Mytahelka

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All Top Poetry (10+ Poetry)  BreakUp Poetry 😩SAD Poetry 😞BrokenHeart Poetry in Urdu and Hindi

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BreakUp Poetry 😩SAD Poetry 😞BrokenHeart Poetry in Urdu and Hindi

 

 

 

इस कदर प्यार की बारिश हो कि जल-थल हो जाऊं

तुम घटा बनकर चले आओ मैं बादल हो जाऊं 

 

घर में बैठा हूं चमकते हुए सोने की तरह..

घर में बैठा हूं चमकते हुए सोने की तरह

मैं जो सड़क पर आ जाऊं तो पीतल हो जाऊं,

 

ढूंढते ढूंढते एक उम्र गुजारी जिसको… वह अगर सामने आ जाए तो पागल हो जाओ,

मुंतज़िर चाको पर हैं मेरी अधूरी मिट्टी तुम जरा हाथ लगाओ तो मुकम्मल हो जाऊं,

तू जरा हाथ लगा दे तो मुकम्मल हो जाऊं…

मेरे सननाटो ने …

मेरे सननाटो ने … आबाद रखा है मुझको मैं तेरे शहर आ जाऊं तो जंगल हो जाऊं।

 

मैं अगर मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना,

कट चुकी है उम्र सारी जिनकी पत्थर तोड़ते अब तो इन हाथों में कोहिनूर होना चाहे।

 

जब अपनी बेखुदी से कुछ नहीं होता…

जब अपनी बेखुदी से कुछ नहीं होता…

पुकारे क्यों किसी को हम किसी से कुछ नहीं होता…

पुकारे क्यों किसी को हम किसी से कुछ नहीं होता…

कोई जब शहर से जाए तो रोनक उठ जाती है किसी के शहर में मौजूदगी से कुछ नहीं होता,

चमक यूं ही नहीं पैदा हुई है मेरी जान तूजमे ना कहना कभी तू  के बेरुखी से कुछ नहीं होता।

 

जो बात खास है वह खुद को भी बताओ नहीं, मैं लुप्त लेता रहूं और मुस्कुराओ नहीं , बस उसे सताने का बस यही तरीका है कि उसके दिल में रहूं और समझ ना आहूं उसे कहीं।

 

जब हंस कर बातें करती हो…

जब हंस कर बातें करती हो…

धूप में बरसाते करती हो…

तुम कितनी बातें करती थी, तुम कितनी बातें करती थी अब किससे बातें करती हो।

 

बहुत रुक-रुक के चलना पड़ रहा है यह सस्ता boot महंगा पड़ रहा है 

तुम्हारे साथ जीना चाहता था…

तुम्हारे साथ जीना चाहता था…

तुम्हारे बिन तो जीना पड़ रहा है 

 

इस जमाने को जमाने की अदा आती है और एक हम हैं हमें सिर्फ वफा आती है।

कोरे कागज पर रो रहे हो तुम…

मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम,

कोरे कागज पर रो रहे हो तुम…

मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम,

क्या कहा मुझसे दूर जाना है..?

क्या कहा मुझसे दूर जाना है..?

इसका मतलब है जा चुके हो तुम

 

अब तलक हो उसको ध्यान हो मेरा

क्या पता यह गुमान हो मेरा खत तेरे रात भर यूं पढ़ता हूं जैसे कि इंतहान हो गया।

 

के एक खलिश है जो कभी हमसे निकली ना गई 

कोई ताजवीर भी मरहम से निकली ना गई 

किया तो दावा था कि तुझे दिल से निकालेंगे मगर तेरी तस्वीर भी एल्बम से निकाली ना गई।

जान देने के लिए गम तो निकाला था तेरे, पर मेरी जान तेरे गम से निकाली ना गई,

 

किसी अनजान नंबर से जब मुझे कोई कॉल आती है तो दिन में जानी पहचानी सी हसरत जाग जाती है

जरा फिर से तो कहना…

क्या?

मोहब्बत तुम करोगे…,

 

जरा फिर से तो कहना…

क्या?

मोहब्बत तुम करोगे…

अरे छोड़ो चलो जाओ तुम्हें तो नींद आती है…

 

रिश्ता चाहे मिट भी जाए लेकिन जसबे रह जाते हैं, यानी पिंजरे उड़ जाता हैं और परिंदा रह जाता है।

तुझको आगे बढ़ना है तो अपने दिल को हल्का कर ले, बॉस उठा कर चलने वाले अक्सर पीछे रह जाते हैं,

मैं उसको ताकता रहता हूं वह मुझको ताकता रहता है, पानी पानी करते-करते दोनों प्यासे रह जाते हैं…

जब वह कहती थी एक शेर सुनाओ तब उसके ऊपर लब को चुमकर हट जाता था…

जब वह कहती थी एक शेर सुनाओ तब उसके ऊपर लब को चुमकर हट जाता था…

उसके जेहन में क्या आता था?,  तेश में आकर कहती थी शेर मुकम्मल कौन करेगा.

 

इश्क के घर से मुकाबिल हो तुम सच पूछो तो जाहिल हो तुम

हाथ में पत्थर लेकर खड़े हो, क्यों मजनू के पीछे पड़े हो..

इश्क के घर से मुकाबिल हो तुम सच पूछो तो जाहिल हो तुम

हाथ में पत्थर लेकर खड़े हो, क्यों मजनू के पीछे पड़े हो..

देखो ये इंसाफ नहीं है एक जवां है एक हंसी हैं, जुर्म बराबर का है यारो…

जुर्म बराबर का है यारो… लैला को भी पत्थर मारो 

 

तुम मेरी आहट से वाकिफ होना..

तुम मेरी आहट से वाकिफ होना..

फिर क्यों मुझको बेल बजानी पड़ती है

और जब भी उसकी चाय पी कर आता हूं…

और जब भी उसकी चाय पी कर आता हूं…

सब यारों को चाय पिलानी पड़ती है ।

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